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Hitler: The Rise Of Evil In Hindi Exclusive

एडॉल्फ हितलर का जन्म 1889 में ऑस्ट्रिया में हुआ था। उसका शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण था। वह एक कलाकार (पेंटर) बनना चाहता था, लेकिन वियना एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स ने उसे दो बार रिजेक्ट कर दिया। अपनों को खोने और गरीबी में जीने के कारण उसके मन में समाज और व्यवस्था के प्रति कड़वाहट भर गई।

सत्ता में आते ही हितलर ने धीरे-धीरे लोकतंत्र को खत्म करना शुरू कर दिया। 'रीचस्टैग' (संसद भवन) में आग लगने की घटना का फायदा उठाकर उसने नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया और 'इनेबलिंग एक्ट' (Enabling Act) पारित कर खुद को सर्वेसर्वा घोषित कर दिया। विरोधियों को कुचल दिया गया और एकाधिकारवादी शासन (Totalitarian Rule) की स्थापना हुई।

"हिटलर: द राइज ऑफ इविल" हमें सिखाता है कि कैसे नफरत, चरम राष्ट्रवाद और आर्थिक अस्थिरता का फायदा उठाकर एक तानाशाह सत्ता पा सकता है। यह इतिहास की एक ऐसी चेतावनी है जिसे दुनिया को कभी नहीं भूलना चाहिए।

5. आर्थिक मंदी और सत्ता का मार्ग

हितलर: द राइज ऑफ इविल (Hitler: The Rise of Evil) - एडॉल्फ हितलर के उदय की पूरी कहानी

युद्ध के बाद हितलर एक छोटी सी राजनीतिक पार्टी 'जर्मन वर्कर्स पार्टी' में शामिल हुआ, जिसे बाद में (National Socialist German Workers' Party) के रूप में जाना गया। अपनी अद्भुत भाषण कला (Oratory Skills) के दम पर उसने जल्द ही पार्टी पर नियंत्रण कर लिया। उसने लोगों को एक बेहतर भविष्य, बेरोजगारी से मुक्ति और जर्मनी के खोए हुए गौरव को वापस दिलाने का सपना दिखाया।